एक नेता मर गया है!

डॉ. एस. आनंद

व्यंग्य कविता

एक नेता मर गया है !

मैंने घर आकर पत्नी से पूछा-
सामने मैदान में क्या हो गया है?
चील -कौए मंडरा रहे हैं
कुत्ते जोर-जोर से भूंक रहे हैं
एक भी आदमी नजर नहीं आता
सिर्फ गिद्व बैठे ऊंघ रहे हैं।
पड़ोसी का लड़का
वहां क्या देखकर डर गया?
पत्नी ने मेरा हाथ पकड़ा
और भीतर खींचते हुए बोली-
तुम भी उधर मत जाना
वहां एक नेता
भाषण देते-देते मर गया है।
– डॉ.एस. आनंद

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