Nayi Aawaz Exclusive : ये हैं Corona के ‘सुपर स्प्रेडर’, बढ़ सकती हैं मुश्किलें

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कोमल सांतोरिया
कोलकाता : हर रोज कोरोना (Corona) के मामले खुद ही अपना रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। मंगलवार को भी राज्य में कोरोना के 2700 से ज्यादा मामले दर्ज हुए। कोलकाता में 719 मामले, उत्तर 24 परगना में 596 व हावड़ा में 190 मामले सामने आये। कोलकाता में कोरोना का आँकड़ा 24 हजार 537 तक जा पहुँचा है। इससे पहले कोलकाता नगर निगम के आधिकारिक सूत्रों ने यह दावा किया था कि महानगर में कोरोना के जो मामले सामने आ रहे हैं, उनमें से 70 फीसदी मरीजों में कोरोना के खास लक्षण नहीं दिख रहे हैं।

कोलकाता के अस्पतालों के चिकित्सकों का भी कुछ यही कहना है। हालांकि यह बात तो चिंता में डालने वाली है ही कि बिना लक्षण के भी मरीजों में कोरोना निकल रहा है लेकिन इससे भी ज्यादा डर की बात यह है कि अब यही लोग कोरोना के ‘सुपर स्प्रेडर’ के तौर पर चिन्हित हो रहे हैं। दरअसल, ऐसा बताया गया है कि कई लोग ऐसे हैं जिनमें कोरोना का कोई लक्षण नहीं है। इसीलिए वे लोग जाँच नहीं कराते। वे आराम से अपने परिवार के साथ रहते हैं। बाजारों में जाते हैं, अपने रोजमर्रा का काम करते हैं। इस तरह वे कई लोगों के संपर्क में आते हैं। बाद में अगर ऐसे लोगों की जाँच होती है तो पता चलता है कि वे कोरोना पॉजिटिव है। इसी बीच वे जितने लोगों के संपर्क में आते हैं उनके लिए भी खतरा बढ़ जाता है।

इस बारे में डॉक्टर्स फॉर पेशेंट्स (डोपा) के सदस्य डॉ. शारदवत मुखर्जी ने बताया कि 70 फीसदी से ज्यादा मरीजों में कोरोना के लक्षण नहीं है। हाँ, यह भी सही है कि इनके कारण कोरोना फैलने की आशंका ज्यादा है। हालांकि इसमें भी एक बात पर ध्यान देने की आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी या जिनका इम्यूनिटी पावर अच्छा है, उनमें कोरोना के लक्षण नहीं नजर आते। हालांकि वे कोरोना की चपेट में होते हैं लेकिन इसमें डरने वाली बात ज्यादा नहीं रहती है। चुँकि ऐसे मरीज अभी ज्यादा मिल रहे हैं इसीलिए तो कोरोना के मामलों एवं मौत के आँकड़ों में अंतर हैं। इसका कारण है कि बिना लक्षण वाले मरीजों में यह बीमारी जानलेवा नहीं होती।

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‘सुपर स्प्रेडर’ का पता लगाने में मदद करेगा ऐंटीजेन टेस्ट

दूसरी तरफ निगम सूत्रों का कहना है कि ‘सुपर स्प्रेडर’ का पता लगाने में ऐंटीजेन टेस्ट काफी मददगार साबित होगा। अभी तक टेस्ट के जो रिपोर्ट आये हैं उनमें बिना लक्षण मरीजों की संख्या ज्यादा है। एंटीजेन टेस्ट की संख्या जितनी बढ़ेगी इन ‘सुपर स्प्रेडर’ का पता लगाना और भी आसान होगा।

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