पवन कुमार धानुका के अकाल प्रयाण से समाज व श्याम जगत स्तब्ध

पवन कुमार धानुका (फाइल फोटो)
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कोलकाता : महानगर में श्याम जगत के सुपरिचित व्यक्तित्व एवं प्रतिष्ठित साड़ी संस्थान गोपाल श्री समूह के कर्णधार पवन कुमार धानुका का 52 वर्ष की उम्र में गुरुवार की रात महानगर के एक प्राइवेट अस्पताल में देहावसान हो गया। उनके पारीवारिक सूत्रों ने उनके प्रयाण की खबर दी। पूरे बड़ाबाजार में शोक की लहर दौड़ गई जबकि सम्पूर्ण श्याम जगत तो इस घटना से स्तब्ध ही रह गया। युवावस्था से बाबा श्याम के प्रति समर्पित श्री धानुका ने लगभग तीस साल पहले जय श्री श्याम सेवा संघ की स्थापना सुपरिचित भजन रचयिता रविन्द्र केजरीवाल रवि सहित महानगर के अनेक विशिष्टजनों के साथ मिलकर की और फिर क्रमश: इस संस्था के बैनर तले घर-घर बाबा श्याम के नाम के गुणगान में तत्पर रहें। श्री धानुका को श्याम जगत में श्याम गुणगान के साथ ही बाबा श्याम के बड़े-बड़े मेलों व महोत्सव में अदभुत, अकल्पनीय व अविश्‍वनीय साज-सजावट के लिए अनूठी पहचान मिली। उनकी बाबा श्याम के प्रति आस्था की पराकाष्ठा का आलम यह था कि हर एकादशी को बाबा का गुणगान व हर द्वादशी को बाबा की धोक के साथ ही फाल्गुन माह के दो महीने पहले से महानगर के विशिष्ट श्याम भक्तों के द्वारा आयोजित महोत्सवों में जी-जान से जुटकर कोलकाता को श्याममय बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ते थे।

कोलकाता के श्री श्याम मंदिर काठगोला, श्री श्याम मंदिर घुसुड़ीधाम, श्री श्याम मंदिर आलमबाजार, श्री श्याम मंदिर पंचवटी सहित अन्य मंदिरों से पूरी आस्था के साथ जुड़े श्री धानुका बाबा श्याम के मुख्य धाम खाटूश्याम जी मंदिर के प्रति प्रमुखता से समर्पित थे। इसके अलावा वे कोलकाता की अनेक धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं से विशेष रुप से सम्बद्ध थे। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी की निजी नाम व किसी भी प्रकार के सम्मान ग्रहण से उन्होंने अपने आप को सदैव दूर रखा।

बड़ाबाजार में पर्दे के पीछे से समाज की सेवा में भी पवन धानुका की अग्रणी भूमिका रही। विशेषकर गर्मी के दिनों में कोलकाता-हावड़ा के विभिन्न इलाकों में लगातार शीतल पेयजल, शर्बत-शिकंजी आदि के शिविर लगाकर लाखों लोगों को लाभान्वित करने में वे तत्पर रहते थे। लोगों को एकजुटता से साथ लेकर असंभव से असंभव कार्य को संभव कर दिखाने का जज्बा रखने वाले श्री धानुका ने अपने व्यवसाय को निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर करने के साथ ही सेवा और साधना के क्षेत्र में अपना जो अतुलनीय अवदान दिया वो उनकी समर्पित कर्तव्य निष्ठा का परिचायक है। ऐसे विरल व्यक्तित्व के 52 वर्ष की अल्पायु में आकस्मिक प्रयाण से सभी मर्माहत हैं। उनके पर अनेक गणमान्य लोगों, संस्थाओं-संगठनों ने गहन संवेदना प्रकट की है ।

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