डॉ. एस. आनंद की कलम से व्यंग्य छन्द ‘बन्दर के हाथ कटार’

डॉ. एस. आनंद, वरिष्ठ साहित्यकार, कथाकार, पत्रकार, व्यंग्यकार
Advertisement

बन्दर के हाथ कटार

बन्दरों के हाथ लगीं
जब से हैं कुछ कटारें
बढ़ गये हैं हादसों के दौर
अपने देश में।
हाथियों की पीठ पर
लदने लगी है खाद
भेड़िए भी हो गये हैं
सिंह शावक वेश में।
कब तलक ईमानदारी की
दुहाई देगा वह
भ्रष्टाचारी अब हवाएं
घुस गयीं दरवेश में।
बढ़ रहे हैं देश में
जयचंद और जाफर कई
लिख रहे हैं देश की
तकदीर शेष-विशेष में।

● डॉ. एस. आनंद, वरिष्ठ साहित्यकार, कथाकार, पत्रकार, व्यंग्यकार

यह भी पढ़ें : डॉ. एस. आनंद की कलम से व्यंग्य कविता ‘ देश का नेता बन जाऊंगा!

Advertisement
     

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here