दिगंबर जैन समाज के दो महान रत्नों पंडित प्रवर रतनलाल बैनाड़ा एवं सवा लाख गोवंश के रक्षक सुरेंद्र जैन के निधन पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि

पंडित प्रवर रतनलाल बैनाड़ा एवं सवा लाख गोवंश के रक्षक सुरेंद्र जैन
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कोलकाता : श्री दिगंबर जैन अग्रवाल समाज, कोलकाता के तत्वाधान में बाल ब्रह्मचारी पंकज जी के सानिध्य में सोमवार को दिगंबर जैन समाज के दो महान रत्नों- जिनशासन के सेवी ज्ञान सागर छात्रावास, सांगानेर के संचालक, पंडित प्रवर रतनलाल बैनाड़ा एवं सवा लाख गोवंश के रक्षक दयोदय महासंघ के महामंत्री सुरेंद्र जैन के निधन पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन जूम एप के द्वारा किया गया।

श्री दिगंबर जैन अग्रवाल समाज एवं कोलकाता पिंजरापोल सोसायटी के अध्यक्ष रमेश सरावगी ने सुरेंद्र जैन के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा, अनन्य गुरु भक्त अचार्य श्री विद्यासागर जी की आज्ञा अनुसार जीव दया पर दिन रात कर्मठता से सेवा करने वाले सुरेंद्र जैन की क्षतिपूर्ति करना बहुत ही मुश्किल है, उन्होंने बताया किस तरह सुंदर जी ने 2 दिन के अंदर कोलकाता पिंजरापोल सोसाइटी के साथ मिलकर दयोदय महासंघ के तत्वाधान में पूर्वी भारत के बॉर्डर पर गोवंश की तस्करी की जा रही हजारों गोवंश की रक्षा की। सुरेंद्र जी कथनी पर नहीं जीव दया पर सक्रिय काम करने में विश्वास रखते थे। साथ ही रमेश जी ने रतनलाल बैनाड़ा को अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वह जैन समाज के मूर्धन्य विद्वान थे।

बाल ब्रह्मचारी पंकज जी ने पंडित प्रवर रतन लाल बैनाड़ा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा आचार्य विद्यासागर महाराज के आज्ञा अनुवर्ती पंडित जी ने जैन धर्म का चौतरफा प्रचार किया। व्रर्ती जीवन जीने वाले पंडित जी ने ज्ञान सागर छात्रावास सांगानेर के माध्यम से हजारों – हजारों युवा पंडितों को जैन धर्म के लिए प्रचार के लिए शिक्षा प्रदान की। उन्होंने कहा पंडित जी निश्चित ही केवल्य को प्राप्त करेंगे क्योंकि ज्ञानदान वास्तव में केवल ज्ञान को प्राप्त कराता है। अहिंसा के क्षेत्र में कर्मठ कार्य करने वाले सुरेंद्र जैन के लिए भी उन्होंने कहा कि जैन धर्म के वास्तविक सिद्धांत अहिंसा परमो धर्म को जीवंत किया है।

विनोद काला ने सुरेंद्र जी को श्रद्धांजलि देते हुए कहा एक महान व्यक्तित्व जिन्होंने जीव को दान देने का जो योगदान दिया है, उसकी क्षति पूर्ण करना समाज के लिए बहुत ही मुश्किल है, समाज ने अपने एक शक्तिशाली स्तंभ को खो दिया है, पंडित जी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा लौकिक धन संपदा की वृद्धि को महत्व न देते हुए जिन धन रुपी संपदा को वृद्धि में पंडित जी ने अतुलनीय योगदान दिया है।

संतोष सेठी ने श्रद्धांजलि में पंडित जी के बारे में कहा हजारों युवा विद्वान संपूर्ण विश्व में जैन धर्म का प्रचार प्रसार सर्वप्रिय सर्व हितकारी पंडित जी की छवि को लेकर ही कर रहे हैं। उन्होंने कहा श्री दिगंबर जैन समाज, कोलकाता जीव दया के क्षेत्र में वंचित था आज वह दयोदय महासंघ और सुरेंद्र जी के कारण ही गोवंश की रक्षा के कार्य में लगा है, सवा लाख गोवंश की रक्षा करने वाले विश्व में ऐसे विरले बहुत ही कम मिलेंगे।

इस भावपूर्ण श्रद्धांजलि का संचालन अजय सरावगी ने किया। पारस पाटनी, पवन जैन, संस्था के महामंत्री अतुल जैन, राजेश सरावगी एवं संपूर्ण भारत वर्ष से इस सभा में समाज से लोग उपस्थित रहकर अपनी श्रद्धांजलि दी।

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